निजी अस्पताल की लापरवाही से मरीज की गई जान, परिजनों ने लगाया आरोप डाक्टर ने कहा लगाए गए आरोप निराधार

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जौनपुर। नगर कोतवाली थाना क्षेत्र के मोहल्ला बाग हाशिम निकट मल्हनी पड़ाव स्तिथ सनाउल्लाह उम्र 32 वर्ष पुत्र सफाहत अंसारी का बीते कुछ दिनों पूर्व सुल्तानपुर में गाड़ी चलाते समय एक्सीडेंट हो गया था जिसमे सनाउल्लाह बुरी तरह घायल हो गया था।घायलवस्था में लोगो ने मरीज़ को नगर क्षेत्र के एक प्राइवेट अस्पताल दुर्गा सिटी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था जहां पर मरीज़ का इलाज बीते 3 दिनों से चल रहा था इसी दौरान मरीज़ की हालत नाज़ुक होते देख हॉस्पिटल द्वारा रेफर करने की बात करते हुए मरीज़ के परिजनों को मरीज़ को सौंप दिया गया जिसके बाद इलाज के लिए वाराणसी जाते समय मरीज़ सनाउल्लाह की मृत्यु हो गई।मृतक के परिजनों ने हॉस्पिटल के स्टाफ व डाक्टरों के ऊपर इलाज के दौरान लापरवाही, दुर्व्यवहार, धमकाने व धन उगाई का आरोप लगाया है मृतक के भाई सफीउल्लाह ने अपने दिए हुए बयान में कहा कि हॉस्पिटल के स्टाफ के द्वारा जब हमारे साथ दुर्व्यवहार हो रहा था तो हमने इसकी शिकायत डॉक्टर आलोक यादव से करनी चाही तो वहा बैठे केबिन के बाहर गार्ड ने मिलने नही दिया और कहा कि डॉक्टर साहब किसी से मिलते नही है और जब हम हॉस्पिटल के मैनेजर से मिलने जाते तो वो मौके पर मिलते ही नहीं थे।मगर जब पैसे की जरूरत होती तो बुलाते थे और पैसा पाकर फिर नही मिलते थे।मृतक के भाई ने बताया कि एक यूनिट रक्त के लिए हमसे 20 हज़ार रुपए लिए जाते थे और बार बार रक्त के लिए मांग की जाती थी इस प्रकरण से साफ जाहिर होता है कि किस तरह से प्राइवेट हॉस्पिटल द्वारा लोगो का शोषण हो रहा है इसी तरह की अप्रिय घटना बीते कुछ दिनों पूर्व में लक्ष्मी हॉस्पिटल कुत्तूपुर में हुई थी वहा पर भी इलाज के दौरान लापरवाही से मृत्यु का आरोप लगा था अब देखना ये है कि स्वास्थ विभाग इन जैसे सैकड़ों हॉस्पिटल जो लोगो के जीवन के साथ खिलवाड़ कर के मनमानी धन उगाही कर रहे है उनके विरुद्ध क्या कार्यवाही की जाएगी ये अपने आप में ही एक बड़ा सवाल है।इस संबध में दुर्गा सिटी के डाक्टर आलोक यादव ने बताया कि मरीज के परिजनों का आरोप निराधार है डाक्टर आलोक का कथन है कि मरीज 4 से 5 दिन तक भर्ती था और मरीज की हालत गंभीर थी मरीज को डायलसिस के लिए बोला गया था मरीज के परिजनों ने मना कर दिया और अपने मरीज को अपनी मर्जी से छुट्टी कराकर लेकर चले गए मरीज के परिजनों द्वारा लिखित मेरे अस्पताल में मौजूद है मरीज के परिजनों की सहमति के बिना इलाज नही किया गया है

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