जौनपुर। कचहरी डाकघर में तैनात पोस्टमैन कुसुम यादव को गर्भावस्था के दौरान अवकाश न दिए जाने तथा इसके बजाय निलंबित कर आरोपपत्र (चार्जशीट) जारी किए जाने का मामला चर्चा का विषय बन गया है। इस घटना के बाद डाक विभाग की कार्यप्रणाली पर कई सवाल उठ रहे हैं।
बताया जा रहा है कि कुसुम यादव ने गर्भावस्था के कारण चिकित्सकीय आधार पर अवकाश के लिए डाक अधीक्षक को प्रार्थना पत्र दिया था। आरोप है कि अवकाश स्वीकृत करने के बजाय विभाग की ओर से किसी मोबाइल पर पोस्टमैन के विरुद्ध समाचार चला को संज्ञान में लेकर डाक अधीक्षक डाक अधीक्षक ने इंस्पेक्टर हर्षवर्धन प्रजापति को दिया जांच के लिए हर्षवर्धन में जांच में लीपा पोती निलंबित कर चार्जशीट जारी कर दी गई। इस कार्रवाई को लेकर कर्मचारी वर्ग और आम लोगों में तरह-तरह की चर्चाएं हैं।
जानकारों का कहना है कि केंद्र सरकार के सेवा नियमों तथा मातृत्व लाभ से संबंधित प्रावधानों का उद्देश्य गर्भवती महिला कर्मचारियों को आवश्यक स्वास्थ्य सुरक्षा और मातृत्व अवकाश उपलब्ध कराना है, ताकि वे बिना मानसिक दबाव के सुरक्षित मातृत्व का लाभ ले सकें।
ऐसे में यदि किसी गर्भवती कर्मचारी के साथ प्रतिकूल कार्रवाई की जाती है तो यह स्वाभाविक रूप से जांच और स्पष्टीकरण का विषय बनता है। उधर, विभागीय सूत्रों का कहना है कि किसी भी कर्मचारी के विरुद्ध की गई कार्रवाई विभागीय नियमों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर होती है। हालांकि इस मामले में अभी तक डाक अधीक्षक की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
अब कर्मचारी संगठनों और सामाजिक संगठनों की नजर इस मामले पर है। उनका कहना है कि यदि गर्भवती कर्मचारी के साथ नियमों के विपरीत कार्रवाई हुई है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए तथा दोषी पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध भी कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं यदि विभाग के पास कार्रवाई के ठोस आधार हैं तो उन्हें सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, जिससे पूरे मामले की वास्तविकता सामने आ सके।












