पत्रकार दानिश हसन
जौनपुर। जिले के शाहगंज तहसील क्षेत्र के पक्खनपुर गांव निवासी डॉक्टर की हार्ट अटैक से मौत हो गई है। डॉक्टर की मौत तब हुई जब वे मरीजों को देख रहें थें। मौत की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया है।
मृतक डॉक्टर विनोद कुमार के संघर्ष की कहानी रूला देने वाली है। उनके पिता आॅटो चलाकर तो भाईयों ने मजदूरी करके उन्हें पढाया था, लेकिन किसी को क्या पता था कि काफी संघर्ष के बाद मंज़िल तक पहुंचने के बाद वह दुनियां से विदा हो जायेंगे। वर्ष 2025 में डॉक्टर बनने के बाद ही एक ही साल में मौत हो जाने से परिवार पर दुखो का पहाड़ टूंट गया है।
विनोद ने कठिन मेहनत के दम पर लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस में प्रवेश हासिल किया। मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उनका चयन कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में ऑर्थोपेडिक्स (हड्डी रोग) विभाग में जूनियर रेजिडेंट के रूप में हुआ था। 15 जनवरी 2025 को उन्होंने यहां अपनी जिम्मेदारी संभाली थी। विनोद के डॉक्टर बनने के बाद परिवार और गांव के लोगों में खुशी की लहर थी। गांव के लोग गर्व से कहते थें कि उनके गांव का बेटा डॉक्टर बन गया है।
डॉक्टर की मौत के बाद उनके बड़े भाई गुलाब ने रोते हुए बताया कि विनोद को करीब चार महीने पहले सीने में दर्द की शिकायत थी। उन्होंने जब इस मसले को लेकर जांच कराया तो शुरूआती जांच में समान्य बताया गया। जांच के बाद डॉ विनोद रोज की भाति मरीजों को देखने में लगें हुए थें। लेकिन उनके सीने में दर्द का होना बना रहा। दोबारा जांच के बाद पता चला कि उनके हार्ट में गंभीर ब्लॉकेज है।
डॉ की आचानक हार्ट अटैक से मौत होने के बाद जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में शोक का माहौल है. मृतक डॉ की मौत के बाद सभी साथी डॉक्टरों ने उन्हें श्रद्धांजली देते हुए बताया कि वे बेहद शांत, विनम्र और मेहनती इंसान थें। वे मरीजों की सेवा में लगें हुए रहते थें। उनका व्यवहार मरीजों के साथ काफी अच्छा था।










