जौनपुर। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तीन वर्ष पूर्व हुए बहुचर्चित कस्टोडियल डेथ (हिरासत में मौत) मामले में आरोपी चार पुलिसकर्मियों को जमानत देने से साफ इनकार कर दिया है।
अदालत ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के आरोपपत्र और अपराध की गंभीरता का संज्ञान लेते हुए राहत की मांग खारिज कर दी। न्यायमूर्ति समित गोपाल ने 30 सितंबर को पारित अपने आदेश में आरोपी पुलिसकर्मियों—जयशील तिवारी, रामकृत यादव, राज कुमार वर्मा और अंगद प्रसाद चौधरी—की जमानत अर्जियों को निरस्त कर दिया।
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई कर रही निचली अदालत को निर्देश दिया कि वह बिना किसी अनावश्यक स्थगन के मुकदमे की कार्यवाही को तेजी से पूरा करे।
सीबीआई की चार्जशीट के अनुसार, पुलिसकर्मियों ने कृष्ण कुमार यादव उर्फ पुजारी से जुर्म कबूल करवाने के लिए उन्हें गंभीर शारीरिक यातनाएं दी थीं। इस दौरान उन्हें ऐसी घातक चोटें पहुंचाई गईं, जिनसे उनकी मौत हो गई।
केंद्रीय जांच एजेंसी ने अपनी तफ्तीश में यह भी पाया कि हिरासत में हुई इस मौत को छिपाने के लिए सरकारी अभिलेखों में हेरफेर किया गया। पुलिसकर्मियों ने झूठे रिकॉर्ड तैयार करके इस घटना को सड़क हादसा या अज्ञात व्यक्तियों द्वारा किया गया हमला दर्शाने का प्रयास किया था।
इस मामले में नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के मेडिकल बोर्ड की राय ने भी इन निष्कर्षों की पुष्टि की। डॉक्टरों के बोर्ड ने स्पष्ट किया कि मृतक के शरीर पर किसी कुंद वस्तु (ब्लंट फोर्स) के प्रहार से कई गंभीर चोटें आई थीं। इन सभी चोटों के संयुक्त असर से शरीर में पहुंचे गहरे आघात (शॉक) के कारण ही उनकी जान गई थी।












