आकस्मिक कक्ष में नियुक्त चिकित्सकों की मनमानी से मरीज बेहाल
जौनपुर। जिला चिकित्सालय उमानाथ सिंह के आकस्मिक कक्ष में नियुक्त ईएमओ की मनमानी आसानी से देखी जा सकती है।
इस कक्ष में नियुक्त चिकित्सक कैसे सरकार के मंसूबे पर पानी फेर रहे हैं। सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि इस अस्पताल के आकस्मिक कक्ष में मरीजों की देखभाल और उनको अच्छी सुविधा देने के लिए कुल दस डाक्टर बतौर ईएमओ नियुक्त किया गया है।
यह ईएमओ आकस्मिक कक्षा से लेकर वार्ड में अलग-अलग स्थान पर ड्यूटी करेंगे। लेकिन आजकल कुछ ऐसा देखने को मिल रहा है कि एक ही ईएमओ आकस्मिक कक्ष में ही ड्यूटी करते हुए पाए जाते हैं। बाकी नव डॉक्टर अपने घर बैठकर ही नौकरी करते हैं। जिसके कारण यह भी देखने को मिलता है कि जब आकस्मिक कक्षा में मरीजों की भीड़ एकत्रित हो जाती है तो एक डॉक्टर के कारण काफी असुविधा उत्पन्न हो जाती है।
एक तो आकस्मिक कक्षा की भीड़ ऊपर से वार्डो से कार्य आता है कि एक मरीज सीरियस है तब यही आकस्मिक कक्ष इमर्जेंसी छोड़कर वार्ड में चले जाते हैं। सूत्र बताते हैं कि अन्य ड्यूटी पर रहने वाले दो अतिरिक्त चिकित्साको को ड्यूटी करने वाला एक डॉक्टर अपनी जिम्मेदारी पर छोड़ देता है जो अपने घर बैठकर ड्यूटी देते हैं।
जिसमें कई चिकित्सक पैसे हैं कि उनकी उनका चेहरा हफ्ते में एक बार नहीं दिखाई देता है जबकि वेतन यह पूरे महीने की लेते हैं। उमानाथ सिंह जिला चिकित्सालय में डॉक्टरों की मनमानी से मरीजों को काफी कठिनाई का सामना उठाना पड़ रहा है वही सरकार से वेतन लेकर लाखों रुपए का चूना यह चिकित्सा लगा रहे हैं।
अक्सर देखा जाता है कि एक ही डॉक्टर सुबह 8:00 बजे से लेकर दूसरे दिन सुबह 8:00 बजे तक ड्यूटी करके अपने साथी डॉक्टरों पूरा का पूरा लाभ पहुंचाने में लगे रहते हैं। अब सवाल इस बात का उठता है कि एक आकस्मिक कक्षा के एक डॉक्टर के भरोसे दोपहर 2:00 बजे से लेकर पूरी रात तक इतना बड़ा अस्पताल चलता रहता है जिसके कारण भर्ती हुए मरीजों और इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
इस स्थान पर एक कहावत बड़ी सही चरितार्थ हो रही है एक अनार सौ बिमारी वाला यह अस्पताल बनता जा रहा है। जबकि जिला अस्पताल के आकस्मिक कक्ष में लगे हुए ड्यूटी बोर्ड पर प्रतिदिन 6 डॉक्टर का नाम लिखा जाता है लेकिन ड्यूटी सिर्फ एक ही डॉक्टर को करते अक्सर देखा जाता है।
जिला चिकित्सालय में आने वाले मरीजों को यह व्यवस्था को देखकर जनप्रतिनिधियों पर भी सवालिया निशान खड़े कर रहे हैं। जनता इस बात को मान रही है कि चुनाव जीतने के बाद जनपद के सांसद समेत कई नेता ऐसे गायब हो गए हैं जैसे गधे के सर से सींग गायब हो गई है। जनपद वासियों प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन से अस्पताल की इस व्यवस्था और घर बैठे वेतन देने वाले चिकित्सकों पर लगाम लगाने की मांग की है।
“दानिश हसन”













