पत्रकार इसरत हुसैन
जौनपुर। जिला महिला चिकित्सालय का एक मामला इन दिनों काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। चर्चा कुछ इस प्रकार है कि मुख्य चिकित्सा अधीक्षक द्वारा बीते कुछ माह पूर्व पुरानी बिल्डिंग में ग्रेनाइट पत्थर को तुड़वाकर उसके स्थान पर घटिया किस्म की टाइल्स लगा दी गई है। जिसे देखकर लोग तरह-तरह की चर्चा कर रहे हैं।
माह फरवरी में ग्रेनाइट को जब निकाला जा रहा था तो उस समय लोग देख कर अपने दांतों तले उंगलियां दबा रहें थें। इतना ही नहीं उन्हें कबीर दास की एक वाणी याद आ गई। जिसमें कबीर ने कहा था बरसै कम्मल भीगे पानी वही किस्सा इस महिला अस्पताल में चरितार्थ हो रही है।
जबकि यही ग्रेनाइट पत्थर उस समय जब महिला अस्पताल में लगाया गया था, तब ही जिला पुरुष अस्पताल में भी लगाया गया था जो अभी भी अपनी चमक से लोगों का मन मोह रहा है। अब तक देखा गया है कि लोग टाइल्स निकलवा कर ग्रेनाइट लगवाते थें, लेकिन यहां ग्रेनाइट निकलवा कर टाइल्स लगवाई गई है।
लोगों में यह भी चर्चा है कि वर्ष 2025 और वर्ष 2026 के बजट का बंदर बांट करने के लिए अच्छे किस्म के इस ग्रेनाइट पत्थर को उखाड़ कर खेल खेला गया है। अस्पताल के एक कोने में निकाले गए ग्रेनाइट पत्थर को रखा गया है जो आज भी शीशे की तरह अपनी चमक को बनाए हुए हैं।
ऐसे पत्थर को अचानक उखाड़ कर इस टाइल्स को लगाना इस बात को साफ करता है कि सरकारी धन का खुले आम दुरुपयोग किया गया है। इस तरह के रवैया से मुख्य चिकित्सा अधीक्षक की मनमानी सवालों के घेरे में खड़ी हो गई है।











