विशेष संवादा फुलचंद गौतम
जौनपुर। जिला चिकित्सालय उमानाथ सिंह में चिकित्सकों की लापरवाही के कारण भर्ती मरीजों का पलायन जहां जारी है वहीं एक बात और चर्चा में है कि मरीजों की देखरेख करने वाले चिकित्सक भी वर्डो से गायब रहते हैं।
ऐसा नहीं है कि अस्पताल में मरीज आते नहीं हैं आते तो विश्वास करके जरूर हैं लेकिन इलाज में लापरवाही के कारण वह निजी चिकित्सालय में जाने के लिए मजबूर हो जाते हैं। दूसरी तरफ कुछ मरीज इस प्रकार होते हैं कि जो मजबूरी में रहकर चाहे जैसी व्यवस्था हो वो अपना दिन काटते रहते हैं। ऐसा नहीं है कि सरकार की व्यवस्था नहीं है सरकार ने हर वार्ड में मरीजों की देखरेख के लिए डॉक्टरों की नियुक्ति कर रखा है लेकिन अस्पताल प्रभारी की मिली भगत से यह डॉक्टर गायब रहते हैं।
इस प्रकार से यह बात कहना कुछ गलत नहीं होगा कि मरीजों के जीवन के साथ यह बड़ा खिलवाड़ जिला अस्पताल में खेला जा रहा है। दूसरी तरफ ऐसा देखने को मिलता है कि जब किसी मरीज की हालत खराब होती है तो स्टाप नर्स वार्ड से चिकित्सक के नदारद होने के कारण जब मरीजों की खरीखोटी सुनते हैं तो मरीज के साथ आए मरीजन को एमरजेंसी कक्ष में भेज देते हैं।
अब प्रश्न इस बात का उठता है कि एमरजेंसी में आए हुए मरीजों को छोड़कर वह चिकित्सक वार्ड में जाता है ऐसे में एमरजेंसी के मरीजों को इसका खामियाजा भोगना पड़ता है। जनपद के सत्ता पक्ष व विपक्ष के नेता भी कभी इस अस्पताल का हाल चाल नहीं लेते कि उनकों वोट देने वाली जनता का इलाज किस तरह से होता है। हमारे जनपद के सत्ता पक्ष के नेता व जन प्रतिनिधी भी इस समय बरही तेरहवीं और उद्घाटन गृह प्रवेश में जाकर जनता को लुभाने के चक्कर में लगे हुए हैं।
एक बात और इस जनपद के सांसद का हाल तो बिल्कुल न पुछिये जो अपने कार्यकर्ताओं के भरोसे जिले की जनता को छोड़कर ऐसे गायब हैं जैसे गधे के सिर से सिंग गायब है। ऐसी हालत में अस्पताल समेत अन्य विभाग के लोग मनमानी नहीं करेंगे तो और क्या होगा।













