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सऊदी अधिकारियों ने प्रेमी जोड़ो के माथा चूमने और गले लगने पर मौत की सजा को किया खारिज़

 

सऊदी अरब में बांग्लादेश के दो नागरिकों को मौत की सजा दिए जाने के मामले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी है। मक्का क्षेत्र की एक मस्जिद में गंभीर अनैतिक कृत्य करने के आरोप में दोनों को मृत्युदंड दिया गया। अब अरब ने फैलाई गई अफवाहों पर सफाई देते हुए बताया कि दोनों पति पत्नी नहीं थें। मंत्रालय ने यह भी साफ किया है कि उन दोनों को मात्र ​कीस और गले लगने पर मौत की सजा नहीं दी गई है। दोनों प्रेमी जोड़ो में महिला शादीशुदा थी जिसे उसके पति ने छोड़ दिया था। आगे जवाब दिया कि तीन साल पहले दोनों ने मस्जिद के अंदर अवैध संबंध बनायें थें जिसके बाद कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए उन्हें फांसी की सजा दी। इस कार्रवाई के बाद बांग्लादेश ने सऊदी अरब के सामने विरोध दर्ज कराया है और अपने नागरिकों को सजा दिए जाने के मामले में आधिकारिक स्पष्टीकरण मांगा है। दूसरी ओर सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं।

इनमें सबसे ज्यादा चर्चा उस दावे की है जिसमें कहा गया कि एक नवविवाहित जोड़े को मस्जिद में केवल माथा चूमने के कारण मौत की सजा दे दी गई। हालांकि सऊदी अधिकारियों ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि मामला इससे कहीं अधिक गंभीर था।  विडियों में मक्का में बैठे कपल को बांग्लादेशी बताकर भ्रामक दावों के साथ वायरल किया जा रहा था जिसके बाद पड़ताल में दोनों कपल मिस्र के रामज़ी और गेहाद एलाबाना निकलें। रामज़ी की पत्नी ने 2024 में मक्का में अपने पति रामज़ी को प्रेग्नेंट होने का इज़्हार करके बताया था।

सऊदी प्रेस एजेंसी के अनुसार बांग्लादेशी नागरिक नजरुल इस्लाम अब्दुल बासिर और सीती अख्तर को 14 अक्टूबर को मौत की सजा दी गई। सऊदी गृह मंत्रालय के बयान में कहा गया कि दोनों मस्जिद के भीतर बेहद अनुचित और अश्लील गतिविधियों में शामिल पाए गए थे। अदालत ने इस कृत्य को मस्जिद की पवित्रता और मर्यादा के खिलाफ गंभीर अपराध माना। सऊदी अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में गंभीर आरोपों के समर्थन में पर्याप्त सबूत मौजूद थे और कानूनी प्रक्रिया के बाद सजा दी गई। हालांकि इस मामले से जुड़े सभी न्यायिक दस्तावेज और विस्तृत साक्ष्य सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं होने के कारण स्वतंत्र रूप से पूरे घटनाक्रम की पुष्टि करना मुश्किल है।

इस घटना के सामने आने के बाद बांग्लादेश सरकार ने भी प्रतिक्रिया दी है। बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद इस्लाम ने सऊदी राजदूत से आधिकारिक तौर पर स्पष्टीकरण मांगा। ढाका ने इस बात पर आपत्ति जताई कि उसके नागरिकों को सजा दिए जाने से पहले बांग्लादेश को कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई। इस घटनाक्रम ने दोनों देशों के बीच राजनयिक संवाद को भी महत्वपूर्ण बना दिया है। अब यह सवाल उठ रहा है कि सजा की जानकारी और उससे संबंधित कानूनी प्रक्रिया के बारे में बांग्लादेश को पहले से अवगत क्यों नहीं कराया गया।

Amanki Shaan News