जौनपुर। जब कार्यकर्ता और नेता सड़क पर थे, तब आखिर कहां थे जौनपुर के दोनों सांसद।5 जून को समाजवादी पार्टी द्वारा आयोजित विशाल धरना-प्रदर्शन में जौनपुर जनपद के लगभग सभी प्रमुख नेता, पदाधिकारी, पूर्व विधायक, वर्तमान विधायक, जिला पंचायत सदस्य, सभासद और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। लेकिन इस पूरे कार्यक्रम में जौनपुर के दोनों सांसद बाबू सिंह कुशवाहा और प्रिय सरोज की गैरमौजूदगी चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन गई।
राजनीतिक गलियारों से लेकर चाय-पान की दुकानों तक एक ही सवाल गूंजता रहा कि जब पार्टी कार्यकर्ता सरकार के खिलाफ सड़क पर संघर्ष कर रहे थे, तब जनता के वोटों से संसद पहुंचे दोनों सांसद आखिर कहां थे? पार्टी के इतने महत्वपूर्ण कार्यक्रम से दूरी ने कार्यकर्ताओं के बीच भी असहज स्थिति पैदा कर दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सांसदों को केवल चुनाव के समय नहीं बल्कि जनता के सुख-दुख और संघर्ष के समय भी मैदान में दिखाई देना चाहिए। धरना-प्रदर्शन जैसे बड़े राजनीतिक कार्यक्रम में अनुपस्थिति ने उनके जनसंपर्क और सक्रियता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सांसदों की गैरहाजिरी ने विपक्ष को भी हमला करने का मौका दे दिया है। कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा भी तेज है कि यदि पार्टी के बड़े आंदोलन में ही सांसद शामिल नहीं होंगे तो जनता की आवाज को मजबूती से कौन उठाएगा। हालांकि दोनों सांसदों की ओर से कार्यक्रम में शामिल न होने को लेकर कोई स्पष्ट सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में सवाल बरकरार है कि क्या यह केवल व्यस्तता थी या फिर इसके पीछे कोई राजनीतिक कारण है।
फिलहाल जौनपुर की जनता और समाजवादी कार्यकर्ता जवाब का इंतजार कर रहे हैं कि पार्टी के इस बड़े शक्ति प्रदर्शन से दोनों सांसदों ने दूरी क्यों बनाई। जनता के बीच यह चर्चा लगातार जोर पकड़ रही है कि सांसदों को संसद के साथ-साथ सड़क पर भी अपनी मौजूदगी दर्ज करानी होगी, तभी जनता का भरोसा मजबूत बना रहेगा।













