जौनपुर। हिंदुस्तान मानवाधिकार संस्था एवं मिशन रिमूव करप्शन के राष्ट्रीय महासचिव वकार हुसैन ने खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन उत्तर प्रदेश और आयुक्त, भारतीय फूड सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण को भेजे गए शिकायती पत्र को सार्वजनिक करते हुए एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि मानव जीवन के मौलि अधिकारों यानी संविधान के अनुच्छेद 21 पर आज दोहरा संकट है।एक तरफ आम नागरिक भ्रष्टाचार से त्रस्त है,वहीं दूसरी तरफ बाजार में बिक रहे दूध,पनीर,खोवा, खाद्य तेल,मसाले ,बैकरी के समानों और मिठाईयां में डिटरजेंट सिंथेटिक दूध, पाम ऑयल और यूरिया जैसे जहरीले पदार्थों की मिलावट की जा रही है।
श्री हुसैन ने कहा कि चिकित्सीय रिपोर्टों के अनुसार यही मिलावट केंसर,हार्ट अटैक लीवर किडनी फेलियर और बच्चों में शारीरिक विकलांगता का प्रमुख कारण बन रही है।कैंसर और हार्ट अटैक से मारने वालों की बढ़ती संख्या इसी मिलावट का दुष्परिणाम है।
वकार हुसैन ने कहा कि सब से अधिक चिंताजनक बात यह है कि इतने गंभीर मानवीय अपराध पर ,कोई ठोस शिकायत प्रणाली काम नहीं कर रही है,जिस का लाभ उठा कर संबंधित विभाग के भ्रष्ट अधिकारी केवल जेब भरने का प्रयास कर रहे हैं,जो सीधे मानवाधिकार का हनन और भ्रष्टाचार को बढ़ावा तथा मिलावट के दोषियों के हौसलों को बढ़ावा।
श्री हुसैन ने अपने शिकायती पत्र द्वारा शीर्ष संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि जनपद स्तर पर मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब के साथ औचक छापेमारी अभियान चला कर,पकड़े गए समानों की लब रिपोर्ट को सार्वजनिक,तथा रिपोर्ट से संस्था को भी सूचित किया जय।
शिकायत के बाद शिकायत दबाने वाले दोषी अधिकारियों/कर्मचारियों पर सतर्कता जांच कर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्यवाई की जाए। राष्ट्रीय महासचिव ने लिखा है कि यदि 15 दिवस के भीतर मिलावट खोरों पर शिकंजा न कसा गया तो हिंदुस्तान मानवाधिकार,प्रकरण को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और उच्च न्यायालय में जनहित याचिका भी दाखिल कर सकती है।











