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बैल की उपयोगिता पर राष्ट्रीय चर्चा समय की मांग, पूरे देश में गौ-हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए मोहम्मद अरशद खान

जौनपुर। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव, भारत किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं जौनपुर सदर के पूर्व विधायक मोहम्मद अरशद खान ने कहा है कि भारत जैसे कृषि प्रधान देश में बैल की उपयोगिता, संरक्षण और उसके भविष्य को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर चर्चा की आवश्यकता है। जिस देश की कृषि व्यवस्था सदियों तक बैलों की शक्ति और किसानों की मेहनत पर आधारित रही हो, वहां आज बैलों की लगातार घटती संख्या चिंता का विषय है।

उन्होंने कहा कि लगभग चार-पांच दशक पहले अधिकांश किसानों के पास दो से चार जोड़ी बैल हुआ करते थे। खेती की जुताई, ढुलाई, बैलगाड़ी, डनलप तथा ग्रामीण परिवहन के अनेक कार्य बैलों के माध्यम से ही संपन्न होते थे। लेकिन आधुनिक यंत्रीकरण और बदलती आर्थिक परिस्थितियों के कारण आज अधिकांश किसानों के पास बैल नहीं रह गए हैं, जिसके कारण उनकी नस्लें धीरे-धीरे समाप्ति की ओर बढ़ रही हैं।

मोहम्मद अरशद खान ने कहा कि देश में गायों के संरक्षण की चर्चा तो होती है, लेकिन बैलों की उपयोगिता, संरक्षण और उनके आर्थिक पुनर्वास पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जाता। यह स्थिति भविष्य में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पशुधन संरक्षण दोनों के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।

उन्होंने कहा कि बैल केवल एक पशु नहीं, बल्कि भारतीय कृषि संस्कृति, ग्रामीण सभ्यता और किसान जीवन की पहचान रहा है। आज आवश्यकता इस बात की है कि सरकार, कृषि वैज्ञानिक, पशुपालक, किसान संगठन तथा सामाजिक संस्थाएं मिलकर बैलों के संरक्षण, नस्ल सुधार और उनके उपयोग के नए क्षेत्रों की खोज के लिए व्यापक राष्ट्रीय विमर्श प्रारंभ करें।

श्री खान ने केंद्र और राज्य सरकारों से मांग की कि बैल आधारित कृषि, जैविक खेती, प्राकृतिक खेती, ग्रामीण परिवहन और पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजनाएं लागू की जाएं। साथ ही किसानों को बैल पालन के लिए आर्थिक सहायता, बीमा, चिकित्सा सुविधाएं और प्रोत्साहन उपलब्ध कराया जाए।

उन्होंने कहा कि गाय भारतीय कृषि और ग्रामीण जीवन की आधारशिला रही है तथा करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ी हुई है। इसलिए देश में गौवंश संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि पूरे देश में गौ-हत्या पर प्रभावी और समान रूप से लागू होने वाला पूर्ण प्रतिबंध सुनिश्चित किया जाए तथा गौवंश के संरक्षण, संवर्धन और पालन-पोषण के लिए राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक नीति बनाई जाए।

मोहम्मद अरशद खान ने कहा कि यदि समय रहते बैलों और गौवंश के संरक्षण के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ियां भारतीय कृषि संस्कृति की इस अमूल्य धरोहर से वंचित हो सकती हैं।

इसलिए बैल की उपयोगिता, गौवंश संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण पर राष्ट्रीय बहस आज की सबसे महत्वपूर्ण जरूरत है।

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